Friday, 28 May 2021

प्लेटो का अनुकरण सिद्धांत//UGC NET JRF HINDI//



यूनान का महान दार्शनिक प्लेटो ( 428 ई.पू ) एक मौलिक चिंतक को रूप में विख्यात है । यह सुकरात का शिष्य था । अरस्तू इसका शिष्य है । होमर या समकालीनालेटो के समय में कवि को समाज में आदरणीय स्थान प्राप्त था । वह ( कवि ) उपदेशक , मार्गदर्शक , संस्कृति का सरमक माना जाता था । रचनाएँ दि रिपब्लिक , दि स्टेट्समैन , दि लाग , श्योन , सिम्पोजियम । अनुकरण सिद्धांत प्लेटो के मत का सार—

1. कविता जगत की अनुकृति है, जगत स्वयं अनुकृति है अत कविता सत्य से दोगुनी दूर है ।

2. कविता भायों को तलित कर व्यक्ति को कुमार्गगामी बनाती है ।

3. कविता अनुपयोगी है । कार का महत्त्व एक मोघी से भी कम है ।

प्लेटो के अनुसार काव्य के प्रयोजन 1. सत्य का उदघाटन 2. मानव कल्याण एवं राष्ट्रोत्थान

3. आनंद प्रदान करना 4. शिक्षा देना

प्लेटो ने काव्य का विरोध चार दृष्टियों से किया---

1. नैतिक आधार

2. भावात्मक आधार

3. बौद्धिक आधार

4. शुद्ध उपयोगितावादी

प्लेटो काव्य का महत्त्व उसी सीमा तक स्वीकार करता है , जहां तक वाह गणराज्य के नागरिकों में सत्य , सदाचार की भावना को प्रतिष्ठित करने में सहायक हो ।

कला और साहित्य की कसौटी उसके लिए आनंद एवं सीवर्य न होकर उपयोगितावाद थी । वह कहता है- आमचमाती हुई स्वर्गजटित अनुपयोगी दाल से गोबर की उपायोगी टोकरी अधिक सुंदर है । उसको विचार से कपि या चित्रकार का महत्व माची या बढ़ाई से भी कम है , क्योंकि यह अति मात्र प्रस्तुत करता है ।

सत्य रूप तो जोवल विशार रूप में अलौकिया जगत में ही है । काष्ण मिथ्या जगत की मिथ्या अनुकृति है । इस प्रकार यह सत्य से दोगुना दुर है । कविता अनुकृति और सर्वथा अनुपयोगी है , इसलिए वह प्रशंसनीय नहीं अपितु दंडनीय है ।  वह कवि के तुलना में एक चिकित्सक , सैनिक या प्रशासक का महत्व अधिक मानता है ।

वह कहता है कि कवि अपनी रचना से लोगों की भावनाओं और वासनाओं को उडेलित कर समाज में दुर्बलता और अनाचार के योषण को भी अपराध करता है । कवि अपनी कविता से आनंद प्रदान करता है परंतु दुराचार एवं कुमार्ग की ओर प्रेरित करता है इसलिए राज्य में सुव्यवस्था हेतु उसे राज्य से निष्कासित कर देना चाहिए ।

उसका मानना था कि किसी समाज में सत्य , न्याय और सदाचार की प्रतिष्ठा तभी संभव है जब उस राज्य के निवासी वासनाओं और भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए विवेक एवं नीति के अनुसार आचरण करें ।

वह चुनौती देते हुए डामर से पूछना चाहता है कि क्या कविता से किसी को रोगमुक्त कर सकती है ? स्या कविता से कोई मुद्ध जीता जा सकता है ? क्या कविता ले श्रेष्ठ शासन व्यवस्था स्थापित की जा सकती है ?

प्लेटों के अनुसार मानय के व्यमितत्व के तीन आतरिक तत्त्व होते हैं- बौद्धिक ऊर्जस्वी एवं सतृष्ण ।

काव्य विराशी होने के बावजूद प्लेटों ने वीर पुरुषों के गुणों को उमारकर प्रत्युत किए जाने वाले श्या देवताओं के स्तोत्र वाले काव्य को महत्वपूर्ण एवं उचित माना है ।

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