Thursday, 27 May 2021

 हिंदी निबंध// निबंधों के प्रकार//UGC/NET JRF//HINDI SHAHIYA

 

हिंदी निबंधों के प्रकार डॉ. गणपतिचंद्र गुप्त ने निबंध के पाँच प्रकार बताए हैं—

1. विचारातमक निबंध 2. भावात्मक निबंध 3. वर्णनात्मक निबंध

4. विवरणात्मक निबंध 5. आत्मपरक निबंध

 

1. विचारात्मक निबंध - गंभीर विषयों पर चिंतन मनन करके लिखे गए निबध विचारात्मक निबंध होते हैं । इनमें बुद्धि को प्रधानता होती है और विचारसूत्रों की प्रमुखता रहती है । लेखक का हृदय पक्ष दबा रहता है तथा बुद्धि पक्ष की प्रबलता इन निबंधों में दिखाई पड़ती है । निबंधों में विचारों को एक श्रृंखला रहती है और सारे विचार पूर्वापर संबंध से एक सूत्र में जुड़े रहते हैं । निबंधों में कहीं व्यास शैली , कहीं समास शैली और कहीं सूत्र शैली अपनाई जाती है । भाषा विषय के अनुसार प्रौढ़ , गंभीर एवं संस्कृतनिष्ठ रहती है । हिंदी में इस प्रकार के निबंध लेखक है - आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी , बाबू श्यामसुंदर दास . आचार्य रामचंद्र शुक्ल . आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी , डॉ . नगेंद्र आदि ।

2. भावात्मक निबंध - भावात्मक निबंधों में भाव पक्ष अर्थात् हृदय पक्ष की प्रधानता होती है । भावात्मक निबंध लेखक को संवेदनशीलता को व्यक्त करते हैं । हिंदी में लिखे गए वे निबंध जिनमें वैयक्तिक संस्पर्श है, संस्मरणात्मक तथ्य दिए गए हैं अथवा जिनमें हास्य व्यंग्य को प्रधानता है , इसी वर्ग के अंतर्गत आते हैं । आचार्य रामचंद्र शुक्ल के मनोविकार संबंधी निबंधों में से कुछ इसी कोटि के हैं । ऐसे निबंधों के लिए ही उनकी यह टिप्पणी उल्लेखनीय है  "यात्रा के लिए निकलती रही है बुद्धि , पर हृदय को भी साथ लेकर । बुद्धि पथ पर हृदय भी अपने लिए कुछ- न- कुछ पाता रहा है ।" उनके ' चिंतामणि ' में संकलित निबंध "उत्साह ' , ' करुणा ' आदि इसी प्रकार के हैं । हिंदी में भावात्मक निबंधकारों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण निबंधकार है - अध्यापक पूर्णसिंह । उनके निबंध आचरण की सभ्यता , मजदूरी और प्रेम , पवित्रता आदि इसी प्रकार के भावात्मक निबंध है । भावात्मक निबंधों में हृदय पक्ष की प्रधानता रहती है तथा हास्य व्यग्य एवं मनोरंजन का तत्व प्रमुख होता है । ये निबंध लेखक के संवेदनशील हृदय का परिचय देते हैं । समाज में व्याप्त राजनीतिक , धार्मिक , सामाजिक विद्रूपताओं को भी इस प्रकार के निबंधों के माध्यम से उजागर किया जाता है । हिंदी निबंधकारों में भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र , प्रतापनारायण मिश्र , अध्यापक पूर्णसिंह , गुलेरी जो , पद्मसिह शमा , ब्रजनंदन सहाय , रायकृष्ण दास इसी प्रकार के निबंधकार हैं ।

3. वर्णनात्मक निबंध - वर्णनात्मक निबंधों में निबंधकार किसी घटना, तथ्य, दृश्य, वस्तु, स्थान आदि का क्रमबद्ध वर्णन इस प्रकार करता है कि पाठक के समक्ष वह दृश्य पटना साकार हो जाती है । वर्णनात्मक निबंधों में बौद्धिकता एवं भावुकता का सामंजस्य रहता है । भाषा सरल एवं सुबोध रहती है तथा लेखक का ध्यान तथ्य निरूपण पर अधिक रहता है, कल्पना पर कम । हिंदी में बालकृष्ण भट्ट , बाबू गुलाबराय कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर एवं रामवृक्ष बेनीपुरी के निबंध इसी श्रेणी के हैं ।

4. विवरणात्मक निबंध - विवरणात्मक निबंधों में ऐतिहासिक , सामाजिक , पौराणिक घटनाओं का विवरण दिया जाता है तथा उनमें कल्पना का भी यथोचित समावेश होता है । वर्णन संवेदनशील एवं मार्मिक होते हैं तथा उनमें क्रमबद्धता पर विशेष बल नहीं होता । वर्णन का संबंध वर्तमान से होता है जबकि विवरण का भूतकाल से । अतः इनमें संभावना पर विशेष बल होता है । हिंदी के प्रारंभिक निबंधकार - भारतेंदु हरिश्चंद्र बालकृष्ण भट्ट , प्रताप नारायण मिश्र , शिवपूजन सहाय आदि ने विवरणात्मक निबंध लिखे है ।

5. आत्मपरक निबंध - यद्यपि हर प्रकार के निबंध में लेखक के व्यक्तित्व को छाप दिखाई देती है तथापि ' आत्मपरक निबंधों में लेखक का व्यक्तित्व पूरी तरह उभरकर सामने आता है । वर्तमान युग में लिखे जाने वाले ललित निबंध भी आत्मपरक निबंधों की कोटि में आते हैं । ललित निबंधों में लालित्य का समावेश भाषा, विषयवस्तु, शैली शिल्प आदि में किया जाता है । लेखक का पांडित्य, लोक संपृक्ति एवं भाषागत सौंदर्य ऐसे निबंधों में साफ झलकता है । आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, डॉ. विद्यानिवास मिश्र, कुबेरनाथ राय हिंदी के प्रमुख ललित निबंधकार हैं । इनके अतिरिक्त डॉ. विवेकी राय, देवेंद्र सत्यार्थी ने भी आत्मपरक निबंधों की रचना की है।

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